शुक्रवार, 17 जून 2011

बता दो हे जगत जननी, मेरा उद्धार कैसे हो:Sanjay Mehta, Ludhiana










Yaa
Devi Sarvabhutesu

Santoshi Rupena Samsthitaa

Namastasyei Namastasyei

Namastasyei Namo Namaha

बता दो हे जगत जननी, मेरा उद्धार कैसे हो..
बह रहा हु अगमधारा मे, बेडा पार कैसे हो..

नहीं श्रद्धा ना है भगति, नहीं विद्या नहीं बुधि
तेरे दासो मे है माता, मेरा शुम्मार कैसे हो..
बहुत भटका हु. विषयों मे.. कही भी शांति नहीं पाई..
फंसा मद मोह माया मे, मेरा निस्तार कैसे हो..
बता दो हे जगत जननी..

चली अविवेक की आंधी, नहीं कुछ सूझ पड़ता है..
मेरे मानस के मंदिर मे, तेरा दीदार कैसे हो..
मे जैसा हु तुम्हार हु , भरोसा आपका भारी,
तो फिर किससे करू फरियाद, मंजिल पार कैसे हो....
बता दो हे जगत जननी..


सहारा दो महाशक्ति, मै पंगु हु.. अति दीना,
बड़ी उलझन मे उलझा हु, कहो उद्दार कैसे हो..
यह विनती है सेवक की, जगत को प्रेममय देखू..
करू बलिदान स्वार्थ का यह उपकार कैसे हो..
बता दो हे जगत जननी..




Sanjay Mehta
Jai Mata Di G



कोई टिप्पणी नहीं: