गुरुवार, 16 जून 2011

भगवान् विष्णु जी का ध्यान: Sanjay Mehta, Ludhiana







भगवान् विष्णु जी का ध्यान



वर्षा के लिए उन्मुख मेघका जैसे वर्ण होता है, वैसा ही उनका भी वर्ण है.. वे सूर्य समान तेजेस्वी , चतुर्भुज और देवताओं के स्वामी है.. उनके दाहिने हाथो मे से एक मे स्वर्ण और रत्नों से विभूषित शंख शोभा पा रहा है.. बाए हाथो मे से एक मे चक्र प्रतिष्टित है.. जिसकी तेजोमयी आक्रति सूर्यमंडल के सामान है.. कौमोद की गदा, जो बड़े बड़े असुरो का विनाश करनेवाली है, उन परमात्मा के दुसरे हाथ मे सुशोभित है तथा उनके दुसरे दाहिने हाथ मे सुगंध्पूर्ण महान पद्म शोभा पा रहा है.. इस प्रकार आयुधोसाहित भगवान कमलापती का ध्यान करना चाहिए. शंख के समान ग्रीवा, गोल-गोल मुख और पद्मपत्र के समान बड़ी -बड़ी आँखे अत्यंत मनोहर जान पड़ती है.. रत्नों के समान चमकीले दांतों से भगवान् हृषिकेश बड़ी शोभा हो रही है.. उनके घुंघराले बाल है.. बिम्बाफल के समान लाल लाल ओठ है.. तथा मस्तक पर धारण किये हुए किरीट से कमल-नयन श्रीहरी अत्यंत सुशोभित हो रहे है.. विशाल रूप, सुंदर नेत्र तथा कौस्तुभमणि से उनकी कान्ति बहुत बढ गाई है.. सूर्य के समान तेज से प्रकाशित होनेवाले कुंडल और पुन्यमय श्रीवत्स-चिन्ह से श्रीहरी सदा देदीप्यमान दिखाई देते है.. उनके श्यामविग्र्ह्पर बाजुबंध, कंगन और मोतियों के हार नक्षत्रो के समान छवि पा रहे है.. इनसे सुशोभित भगवान विजय विजयी पुरशो मे सर्वश्रेष्ठ जान पड़ते है सोने के समान रंगवाले पीताम्बर से गोविन्द की सुषमा और भी बढ गई है.. रत्नजटित मुन्द्रियो से सुशोभित उंगलियों के कारण भगवान् बड़े सुंदर प्रतीत होते है.. सब प्रकार के आयुधो से पूर्ण और दिव्या आभुष्नो से विभूषित श्रीहरी गरुड़ की पीठ पर विराजमान है.. वे इस विश्व के स्वामी है ...

जो मनुष्य इस प्रकार भगवान की मनोहर झांकी का प्रतिदिन अनन्य चित से ध्यान करता है.. वह सब पाप से मुक्त हो अंत मे भगवान श्री विष्णु के लोक को जाता है..
बोलो लक्ष्मीपति भगवान् विष्णु की जय..

Sanjay Mehta

Jai Mata di G







1 टिप्पणी:

स्वाती गुप्ता ♥ श्री राधे ♥ ने कहा…

♥!!!۞!!!♥ ॥ॐ नमो भगवते वासु देवाय :♥!!!۞!!!♥ ॥

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♥!!!۞!!!♥ ॥ॐ नमो भगवते वासु देवाय :♥!!!۞!!!♥ ॥