शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

प्रार्थना









प्रार्थना


दयामयी जननी! आनंदमयी, स्नेहमयी, अमृतमयी माँ!! तुम्हारी जय हो! माँ! जिस प्रकार बिना पंख के पक्षी अपनी माँ की बाट जोहते रहते है, जैसे भूख से पीड़ित बछड़े अपनी माँ की बाट देखते रहते है, वैसे ही माँ! मै तुम्हारी बाट देखता रहता हु। माँ तुम जल्दी से आकर मुझे दर्शन दो। तुम मेरे मन में, शरीर में व्याप्त हो। मै तुम्हे समझ सकू, तुम्हारा दर्शन कर सकूँ, ऐसी बुद्धिशक्ति मुझे प्रदान करो माँ
जय माँ दुर्गे
जय माँ कालिके
जय माँ वैष्णवी
जय माँ राज रानी

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Sanjay Mehta







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