शनिवार, 22 सितंबर 2012

जय माँ शताक्षी By Sanjay Mehta Ludhiana







"जय माँ शताक्षी"

"वेदान्तके अध्यन से समझ में आनेवाली ब्रह्मस्वरूपनी देवी! तुम्हे बार बार नमस्कार है. अपनी माया से जगत को धारण करनेवाली तथा भक्तो के लिए कल्पवृक्ष एवं श्रदालु व्यक्तियों के कल्याणार्थ दिव्या विग्रह धारण करनेवाली देवी.. तुम्हे अनेक प्रणाम है . सदा तृप्त रहनेवाली अनुपम रूपों में सुशोभित भुवनेश्वरी! तुम्हे नमस्कार है. देवी तुमने हमारा संकट दूर करने के लिए सहस्त्रो नेत्रों से सम्पन्न अनुपम रूप धारण किया है. अतएव अब तुम "शताक्षी" इस नाम से विराजने की कृपा करो मा
भ्रमणशील जगत की एकमात्र कारण भगवती परमेश्वरी! शाकम्भरी! शतलोचने! तुम्हे अनेकश: नमस्कार है, सम्पूर्ण उपनिषदों से प्रंशासित तथा दुर्गम नामक दैत्य की संहारिणी एवं पंचकोश में रहनेवाली कल्याणस्वरूप्नी भगवती माहेश्वरी! तुम्हे नमस्कार है, मुनीश्वर शांतचित से जिनका ध्यान करते है तथा जिनका विग्रह ही प्रणव का अर्थ है, उन भगवती भुवनेश्वरी की हम उपासना करते है, अनंत कोटि ब्रेह्मंड़ो की जिनसे उत्पति हुई है तथा जो दिव्या विग्रह से सुशोभित है एवं जिन्होंने ब्रह्मा, विष्णु आदि को प्रकट किया है, उन भगवती भुवनेश्वरी के श्री चरणों में हम सर्वतोभाव से मस्तक झुकाते है, सबकी व्यवस्था करनेवाली माता शताक्षी दया से परिपूर्ण है, इनके सिवा कोई भी राजा-महाराजा ऐसा नहीं है, जिसे संकटग्रस्त हीन व्यक्तियों को देखर इतनी रुलाई आ सके.
जय माँ शताक्षी . जय जय माँ .. जय माँ राजरानी... जय माँ दुर्गे... जय माँ वैष्णो देवी. जय माता दी जी

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Sanjay Mehta








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