गुरुवार, 7 जून 2012

श्री भगवती नाम माला : Shree Bhagvati Naam Mala By Sanjay mehta Ludhiana







श्री भगवती नाम माला

एक दिन वट वृक्ष के नीचे थे शंकर जी ध्यान में
सती की आवाज आई मीठी उनके कान में
दुनिया के मालिक मेरे अविनाशी तुम भंडारी हो
देवन के महादेव हो त्रिशूल डमरू-धारी हो


विनय सुनकर मेरी भगवान दया तो दिखलाइये
भगवती की नाम माला मुझ को भी बतलाइए
इतना सुन कर मुस्कराकर तब बोले गिरिजा पति
अपने नामो की ही महिमा सुनना चाहती हो सती

तो सुनो यह नाम तेरे जो मनुष्य भी गायेगा
दुनिया में भोगेगा सुख अंत मुक्ति पायेगा
नाम जो स्त्रोत तुम्हारा मन्त्र एक सौ आठ का
जो पढ़ेगा फल वो पायेगा सारे दुर्गा पाठ का

लों सुनाता हु तुम्हे कितने पवित्र नाम है
जिसके पढने सुनाने से होते पूर्ण काम है
उमा इन नामो को जो भी मेरे सन्मुख गायेगा
मै भरू भंडारे उसके मांगेगा जो पायेगा

सती, साध्वी, भवप्रीता, जय भव मोचनी, भवानी जय
दुर्गा, आर्य जय त्र्य्लोच्नी , शुलेश्व्री महारानी जय
चंडघंटा, महातपा, विचित्र मनपिनाक धारनी जय
सत्यानन्द स्वरुप्नी , सती भक्तन कष्टनिवारनी जय

चेतना, बुद्धि, चित्त रूपा, चिंता, अहंकार, निवारनी जय
सर्वमन्त्र माया, भावनी, भव्य, मानुष जन्म सवारनी जय
तू अनंता, भव्य, अभव्या, देव माता, शिव प्यारी है
दक्ष यज्ञ विनाशनी, तू सुर सुन्दरी दक्ष कुमारी है

तू काली, महाकाली, चंडी, ज्वाला, नैना दाती है
चामुंडा निशुम्ब विनाशनी, दुःख दानव की घाती है
कन्या कौमारी , किशोरी, महिषासुर को मार दिया
चंड - मुण्ड नाशिनी, जय बाला दुष्टों का संहार किया

शस्त्र वेदज्ञाता , जगत जननी खण्डा धारती है
संकट हरनी मंगल करनी , तू दासो को तारती है
कल्याणी, विष्णु माया, तू जलोधरी, परमेश्वरी जय
भद्रकाली, प्रितिपालक , शक्ति जगदम्बे जगेश्वरी जय

तू नारायणी 'चमन/संजय' की रक्षक वैष्णवी ब्रेह्मानी तू
वायु, निंद्रा अष्टभुजी सिंघ्वाहिनी सब सुखदानी तू
ऐन्द्री, कैशी, अग्नि, मुक्ति, शिवदूती कहलाती हो
रुद्र्मुखी, परौडा, महेश्वरी, रिद्धि सिद्धि बन जाती हो

दुर्गा जगदम्बे महामाया कन्या आध कंवारी हो
अन्नपूर्णा चिन्तपुरनी , शीतला शेर सवारी हो
पाटला, पाटलावती, कुष्मांडा पीताम्बर धारनी जय
कात्यायनी , जय लक्ष्मी वाराही भाग्य सवारनी जय

सर्वव्यापनी जीव जन्म दाता तू पालनहारी है
कर्ता धर्ता हर्ता मैया तेरी महिमा न्यारी है
तेरे नाम अनेक है दाती कौन पार पा सकता है
तेरी दया से 'चमन /संजय' भवानी गुण तेरे गा सकता है

जगत माता महारानी अम्बे एक सौ आठ ये नाम
'चमन /संजय' पढ़े सुने जो श्रद्धा से पुरे हो सब काम
Sanjay Mehta






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