शुक्रवार, 26 जून 2015

ज्वालामुखी : Jwalamukhi : Sanjay Mehta Ludhiana









ज्वालामुखी : यहाँ देवी देह की जिह्वा का पतन हुआ था। यहां की शक्ति "सिद्धिदा" और भैरव "उन्मत्त" है। मंदिर के भीतर मशाल जैसी ज्योति निकलती है . शिवपुराण तथा देवी भागवत के अनुसार इसी को देवी का ज्वालारूप माना माना गया है। यहाँ मंदिर के पीछे की दीवार के गोखले में ४ कोने में से 1. दाहिनी और की दीवरसे १ और की दीवार से १ और मध्य के कुण्ड की भित्तियों से ४ - इस प्रकार दस प्रकाश निकलते है . इनके अतरिक्त और भी कई प्रकाश मंदिर की भित्ति के पिछले भाग से निकलते है . इनमे से कई स्वत: बुझते और प्रकाशित होते रहते है। ये ज्योतियां प्राचीनकाल से जल रही है . ज्योतियों को दूध पिलाया जाता है तो उसमे बत्ती तैरने लगती है। और कुछ देर तक नाचती रहती है। यह दृश्य ह्रदय को बरबस आकृष्ट कर लेता है। ज्योतियों की संख्या अधिक-से-अधिक तेरह और काम-से-कम तीन होती है
जय माता दी जी








2 टिप्‍पणियां:

Priya ने कहा…

This Is really nic blog.
Jwala Devi - The Power of Flame Amidst the Snow Cladded Mountains Hotels in Jwalaji

Unknown ने कहा…

Jai Mata Di