गुरुवार, 10 नवंबर 2011

दण्डी स्वामी जी डेरा लुधियाने लाया ऐ: Dandi Swami Ji Maharaj By Sanjay Mehta Ludhiana









दण्डी स्वामी जी डेरा लुधियाने लाया ऐ
आके इस धरती दा भाग जगाया ऐ
बोलो दण्डी स्वामी जी महाराज की जय


काशी ते श्री पट्टी छड्डी छड़िय घर परिवार
सब कुछ भूल के सानु एहना किता दिल्लो प्यार
सारेया दा एहना ने जीवन बनाया ऐ
आके इस धरती दा भाग जगाया ऐ

तप दे धनी ते नाम दे रसिया साडे श्री महाराज
तपोवन विच आन विराजे सब नु रहे निवाज
जिन्हें वी आके दर शीश झुकाया ऐ
आके इस धरती दा भाग जगाया ऐ

राम कहो श्री राम जपो एहो समझाया सब नु
राम होवे हर सांस सांस ते ताही पाओगे रब्ब नु
प्रभु दे मिलन दा सच्चा रास्ता दिखाया ऐ
आके इस धरती दा भाग जगाया ऐ

निगाह स्व्वली सब ते करदे फ़र्क ना रखदे कोई
शाह फकीर सब इक बराबर दर आ जावे कोई
अपना बनांदे कोई बेगाना ना बनाया ऐ
आके इस धरती दा भाग जगाया ऐ

संजय इस दाते दे चरना नाल जुड़ के बेह्जा
एवें भटक ना एधर ओधर इसदा हो के रह जा
ओह्न्दे भाग चंगे जिनहु एहना अपनाया ऐ
आके इस धरती दा भाग जगाया ऐ









मन मंदिर मे जोत लगाके - जय जय कार बुलाओ : Mn Mandir Mai Jyot Lgake- By Sanjay mehta Ludhiana









मन मंदिर मे जोत लगाके - जय जय कार बुलाओ
मुह माँगा फल देने वाली - माँ की महिमा गाओ

दुष्टों का वध करती माँ अष्ट भुजाओ वाली
भगतो की सदा रक्षा करे सुख सम्पदा देने वाली
माँ की कृपा से जीवन के - सब भय संताप मिटाओ
मुह माँगा फल देने वाली - माँ की महिमा गाओ



रोग शोक ना पास आये जो माँ के है गुण गाते
माँ को याद करे जो हर दम - भगत भैया को भाते
अपने जीवन मे प्यारे आशा के दीप जलाओ
मुह माँगा फल देने वाली - माँ की महिमा गाओ


मैया के दरबार मे आके कोई न लौटा खाली
नजरे कर्म है करती सब पर मैया ज्योता वाली
याद करो हर स्वांस स्वांस से पल न व्यर्थ गवाओ
मुह माँगा फल देने वाली - माँ की महिमा गाओ


पतझड़ मे भी फूल खिलाती है माँ शेरावाली
महकाए माँ सब के चमन को माँ की कृपा निराली
मैया जी की भागती मे मन अपना रंगते जाओ
मुह माँगा फल देने वाली - माँ की महिमा गाओ


जगजननी मैया को जो भी दिल से याद है करते
किसी बात का डर ना रहे वो भवसागर पार उतारते
संजय ये बात है सच्ची पगले मन को समझाओ
मुह माँगा फल देने वाली - माँ की महिमा गाओ







बुधवार, 9 नवंबर 2011

पौड़ी पौड़ी चढ़ दा जा भगता: Paudi Paudi Chad-da Jaa Bhagta.. Sanjay Mehta Ludhiana









सारे बोलो जय माता दी
प्रेम से बोलो जय माता दी
मिल के बोलो जय माता दी
जोर से बोलो जय माता दी
जय कारा शेरोवाली दा
बोल साचे दरबार की जय

पौड़ी पौड़ी चढ़ दा जा भगता जय माता दी करदा जा भगता
उचे पर्वतों की चढ़ लो चढाई भगतो सुंदर गुफा मे विराजे महामाई भगतो
उचे पर्वतों की चढ़ लो चढाई भगतो सुंदर गुफा मे विराजे महामाई भगतो
पौड़ी पौड़ी चढ़ दा जा भगता जय माता दी करदा जा भगता



जय माँ जय माँ जय माँ जय जय माँ


कटरा से चल कर दर्शनी द्वार से आगे कदम बड़ा लो,
बाण गंगा के शीतल जल मे दुबकी एक लगा लो
दुबकी एक लगा लो , दुबकी एक लगा लो


चरण पादुका मंदिर मे भी झुक कर माथा टेको
आध कुवारी गर्भ जून का भाव से जलवा देखो
भाव से जलवा देखो ,भाव से जलवा देखो

रुत अम्बे माँ के दर्शनों की आई भगतो , सुंदर गुफा मे विराजे महामाई भगतो
रुत अम्बे माँ के दर्शनों की आई भगतो , सुंदर गुफा मे विराजे महामाई भगतो
पौड़ी पौड़ी चढ़ दा जा भगता जय माता दी करदा जा भगता

सारे बोलो जय माता दी
प्रेम से बोलो जय माता दी
मिल के बोलो जय माता दी
जोर से बोलो जय माता दी
जय कारा ज्योतावाली दा
बोल साचे दरबार की जय


हाथी मथा कठिन रास्ते, देख ना हिमत हारो
माँ के भगतो अम्बे माँ का, मन से नाम उचारो
मन से नाम उचारो ,मन से नाम उचारो


सांझी छत पर रुक कर अपनी थोड़ी थकन मिटाओ
श्रधा भाव से तुम कंजको को पैसे दे के जाओ
पैसे दे के जाओ ,पैसे दे के जाओ

सची भावना की कर लो कमाई भगतो, सुंदर गुफा मे विराजे महामाई भगतो
पौड़ी पौड़ी चढ़ दा जा भगता जय माता दी करदा जा भागता

जय माँ जय माँ जय माँ जय जय माँ


माँ के चरणों की गंगा मे अपनी धो लो काया
वैष्णो देवी के दर्शन का पावन अवसर आया
पावन अवसर आया, पावन अवसर आया

गुफा के अंदर पिंडियो का देखो आज नजारा
झुक के यहाँ पर लेता मुरादे कहते है जग सारा
कहते है जग सारा ,कहते है जग सारा


होती सब की ही यहाँ पर सुनवाई भगतो , सुंदर गुफा मे विराजे महामाई भगतो
पौड़ी पौड़ी चढ़ दा जा भगता जय माता दी करदा जा भगतो

धरती बोलो जय माता दी
अम्बर बोलो जय माता दी
पर्वत बोलो जय माता दी
नदिया बोले जय माता दी
पवन भी बोलो जय माता दी
झरना बोले जय माता दी
संजय मेहता भी बोलो जय माता दी
तुम भी बोलो जय माता दी
जैकारा शेरोवाली दा
बोल साचे दरबार की जय

जैकारा पहाड़ो वाली दा
बोल साचे दरबार की जय







मंगलवार, 8 नवंबर 2011

ले के मैया का सिंगार कर के माँ की जय जय कार : Le ke Maiya ka Shingar By Sanjay mehta, Ludhiana









ले के मैया का सिंगार कर के माँ की जय जय कार
चल के आई हु आई मै मैया के दर

लाल लाल चोला माँ का लाल लाल चुनरी
माथे की बिंदिया लाई हाथो की मुंदरी
गले का लाई स्वर्ण हार , करती माँ की जय जय कार
चल के आई हु आई मै मैया के दर

चुन चुन फूलो की माला बनाई
प्यार से मैंने माँ के गले मे सजाई
चूड़ी लाई मीनेदार , करती माँ की जय जय कार
चल के आई हु आई मै मैया के दर


पान सुपारी माँ की भेंट चडाऊ
हलवे चने से माँ को भोग लगाऊ
मैया पाने तेरा प्यार , करती माँ की जय जय कार
चल के आई हु आई मै मैया के दर


सोने का मैया मै तो छत्र चडाऊ
माथे की बिंदिया मै माँ को लगाऊ
चोला लाई गोटेदार , , करती माँ की जय जय कार
चल के आई हु आई मै मैया के दर

पैरो की पायल लाई, हाथो का कंगना..
रोज बुहारू मै तो माँ तेरा अंगना
आई छोड़ के घर बार , करती माँ की जय जय कार
चल के आई हु आई मै मैया के दर

दर्शन माँ के पाऊ लग्न यह लगाई
शेरावाली मैया की करती मै दुहाई
बेनती करती बारम्बार , करती माँ की जय जय कार
चल के आई हु आई मै मैया के दर











शनिवार, 5 नवंबर 2011

Jinda The To Kisi ne Pass Bhi Bithya Nahi : जिंदा थे तो किसी ने पास भी बिठाया नहीं : Sanjay Mehta Ludhiana









जिंदा थे तो किसी ने पास भी बिठाया नहीं
अब खुद मेरे चारो और बेठे है
पहले कभी किसी ने मेरा हाल भी ना पूछा
अब सभी आंसू बहाए जा रहे है
एक रुमाल भी भेंट ना किया जब हम जिंदा थे
अब शाले और कपडे उपर से ओडाये जा रहे है
सब को पता है के अब इसके काम के नहीं
मगर फिर भी बेचारे दुनियादारी निभाए जा रहे है
कभी किसी ने एक वक्त का खाना नहीं खिलाया
अब देसी घी मेरे मुह मे डाले जा रहे है
जिंदगी मे एक कदम भी साथ ना चल सका कोई
अब फूलो से सजाकर कंधे पे उठाये जा रहे है
अब पता चला की मौत जिंदगी से कितनी बेहतर है
हम तो बेवजह ही जिंदगी की चाहत किये जा रहे है
हे राम.. जय जय राम.. जय माता दी माँ के प्यारे भगतो..
बोलिए जय माता दी .. जय जय माँ





Ni main nachna Shyam de naal:नी मै नचना श्याम दे नाल अज मेनू नच लें दे : By Sanjay Mehta, Ludhiana









Ni main nachna Shyam de naal aaj maino nach len de - 2
Ni main nachna Shyam de naal aaj maino nach len de - 2
Duniya to main nachya bathera - 2
Phir bhi na koi banya mera - 2
Ni main ki karna sansar aaj maino nach lende
Ni main ki karna sansar aaj maino nach lende
Ni main nachna Shyam de naal aaj maino nach len de
Ni main nachna Shyam de naal aaj maino nach len de


नी मै नचना श्याम दे नाल अज मेनू नच लें दे
नी मै नचना श्याम दे नाल अज मेनू नच लें दे



दुनिया तो मै नचिया बथेरा
दुनिया तो मै नचिया बथेरा

फिर भी ना कोई बनया मेरा
फिर भी ना कोई बनया मेरा

नि मै की करना संसार अज मेनू नच लेनदे
नि मै की करना संसार अज मेनू नच लेनदे

नी मै नचना श्याम दे नाल अज मेनू नच लें दे
नी मै नचना श्याम दे नाल अज मेनू नच लें दे






बुधवार, 2 नवंबर 2011

जब चली माँ सिंह पे चडके.. : Jab Chali Maa Singh Pe Chadke.. By Sanjay mehta Ludhiana









जब चली माँ सिंह पे चडके..
माँ बन के बिजली कड़के..
सब असुरो के दिल धडके..
मेरी माँ शेरावाली ..
बनी काली माँ महाकाली


जब चलते असुर अकडके
तब अष्ट बुजाये फडके..
माँ मारे असुर पकड के
मेरी माँ शेरावाली ..
बनी काली माँ महाकाली


मधु केट्भ मारे
रक्तबीज संहार
माँ दुम्र्विलोचन
का सर उतारा
महिषासुर संहारा..
तेरी बोले जय जय कारा
मेरी माँ शेरावाली ..
बनी काली माँ महाकाली



माँ दुर्गा भवानी
शिव की पटरानी
ओ मंगलकरनी
माँ संकट हरनी
मैया तेरे द्वारपाल
भैरव विकराल
मेरी माँ शेरावाली ..
बनी काली माँ महाकाली

जब जब आते है तेरे नवरात्रे
सारी दुनिया मे होते है जगराते
माँ आदह अनाधि तू ही कहलाती
तुझे पूजे हर एक जाती
मेरी माँ शेरावाली ..
बनी काली माँ महाकाली

जब चली माँ सिंह पे चडके..
माँ बन के बिजली कड़के..
सब असुरो के दिल धडके..
मेरी माँ शेरावाली ..
बनी काली माँ महाकाली


जब चलते असुर अकडके
तब अष्ट बुजाये फडके..
माँ मारे असुर पकड के
मेरी माँ शेरावाली ..
बनी काली माँ महाकाली








सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

माए नी कुंडा खोलदे : Maaye ni kunda Khol de: Sanjay Mehta Ludhiana










दीद करन नु पापी आये
सत्संगी सन्यासी आये
द्वार तेरे नु टोल्दे
माए नी कुंडा खोलदे

बड़े डरौने डंस गमा दे
भडक रहे ते कडक रहे
दुःख दे मारे भगत बिचारे
द्वार ते बैठे तरस रहे

मार गई मज़बूरी हल्ले
नैना ता रो - रो हो गए झल्ले
पौरा वांगु डोल्दे
माए ने कुंडा खोलदे

पैरां दे विच रिस्दे छाले
थक के हो गए चूर बड़े
बिना दर्श दे पीड़ा देंदे
सिने विच नासूर बड़े

मुख ते उडन हवाइया माये
बच्चे दें दुहाईया माये
मुहो कुझ ता बोल दे
माए नु कुंडा खोल दे

असी गुनाह दे हा पुतले
माए नी भुल्नहारे हां
गुस्सा छड दे आखिर
माए तेरी अख दे तारे हां

हे अम्बे 'संजय' दी माँ भवानी
हे जगदेवा कल्याणी
प्यार दा अमृत घोल दे
माए नी कुंडा खोल दे






बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

माँ और ध्यान भगत की बात







माँ और ध्यान भगत की बात


माँ:- तू भगतो मे भगत मेरा मैंने तेरी भगती मानी है... तोड़ भी दे अभिमान ध्यानु कोन ऐसा अभिमानी है..

ध्यानु जी :- मेरी बचाई लाज री अम्बे तेरी अजब कहानी है .. तीनो लोक मे राज तेरा तू सब से बड़ी महारानी है

माँ:- तेरी भगती से हु खुश मै.. सुन ध्यानु भगत प्यारे .. तेरी भगती से हु खुश मै.. सुन ध्यानु भगत मेरे प्यारे ..
तुने भगती भाव दिखाया सुन मेरी आँखों के तारे.. जान गई तेरे गुण सारे तू भगत मेरा बड़ा ग्यानी है..

ध्यानु जी :- मेरी लाज बचाई री अम्बे तेरी अजब कहानी है .. तीनो लोक मे राज तेरा तू सब से बड़ी महारानी है

ध्यानु जी :- हे अम्बे सुन जगदम्बे तुने मेरा मान बढाया है.. हे अम्बे सुन जगदम्बे तुने मेरा मान बढाया है..
हे ज्योति रूप ज्वाला इस भगत को दर्श दिखाया है..इस भगत को दर्श दिखाया है.. तू सब से बड़ी महामाया है
तू ही तो ज्ग्कल्यानी है

माँ:- तू भगतो मे भगत मेरा मैंने तेरी भगती मानी है... तोड़ भी दे अभिमान ध्यानु कोन ऐसा अभिमानी है..

माँ:- अभिमानी सा वो अकबर चल मेरे दर पे आएगा..

ध्यानु जी :- अभिमान भरा वो मस्तक आ तेरे चरणों मे वो झुकाएगा

माँ:- ध्यानु जगत सरहावेगा जो तुने दी कुर्बानी है
मेरे साथ साथ हे ध्यानु तेरा जग मे चलता नाम रहे -2

ध्यानु जी :- तेरे चरणों मे जगदम्बे मेरा जन्म जन्म प्रणाम रहे

संजय मेहता कहे.. माँ तुम सा ना कोई दानी है
बोलिए माँ ज्वाला देवी की जय..
बोलिए ध्यानु भगत की जय





सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

चिन्तपुरनी का इतिहास: History of Maa Chintpurni By Sanjay Mehta Ludhiana







चिन्तपुरनी का इतिहास
(भगत माईदास की कथा)







कहा जाता है के माईदास नामक दुर्गा - माता के एक श्रदालु भगत ने इस स्थान की खोज की थी.. दन्त-कथा के अनुसार माईदास के पिता अठर नामी गाव (रियासत पटियाला) के निवासी थी.. इनके तीन पुत्र थे
देवीदास , दुर्गादास व् सबसे छोटे माईदास

अपने पिता की भाँती ही माईदास का अधिकतर समय देवी के पूजा पाठ मे वेय्तीत होता था . इस कारन वह अपने बड़े दो भाइयो के साथ व्यापार आदि काम काज मे पुरा समय ना दे पाते थे.. इसी बात को लेकर उनके भाइयो ने उन्हें घर से अलग कर दिया.. परन्तु माईदास ने फिर भी अपनी भगति व् दिनचर्या मे कोई कमी ना आने दी.. एक बार अपनी ससुराल जाते समय माईदास जी मार्ग मे घने जंगल मे वट-वृक्ष के नीचे आराम करने बैठ गए ( इस स्थान का प्राचीन नाम छ्प्रोह था और आजकल उसी वट वृक्ष के नीचे चिन्तपुरनी मंदिर बना हुआ है)

संयोगवश माईदास जी की आँख लग गई तथा स्वप्न मे उन्हें दिव्या - तेज से युक्त एक कन्या दिखाई दी.. जिसने उन्हें आदेश दिया के तुम इसी स्थान पर रहकर मेरी सेवा करो.. इसी मे तुम्हारा भला है.. तन्द्रा टूटने पर वह फिर ससुराल की और चल दिए.. परन्तु उनके मस्तिष्क मे बार बार वह ध्वनि गूंजती रही 'इस स्थान पर रहकर मेरी सेवा करो, इसी मे तुम्हारा भला है '

ससुराल से वापिस आते समय माईदास के कदम फिर यहाँ ठिठक गए.. घबराहट मे वह फिर उसी वट-वृक्ष के छाया मे बैठ गए और भगवती की स्तुति करने लगे.. उन्होंने मन ही मन प्राथना की - माता यदि मे शुद्ध हृदय से आप की उपासना की है तो प्रत्यक्ष दर्शन देकर मुझे आदेश दे.. जिससे मेरा संशय दूर हो .. बार बार स्तुति करने पर उन्हें सिंह वाहिनी दुर्गा के चतुर्भुजी रूप मे साक्षात दर्शन हुए.

देवी ने कहा कि मै इस वृक्ष के नीचे चिरकाल से विराजमान हु.. लोग यवनों के आक्रमण तथा अत्याचारों के कारण मुझे भूल गए है.. मै इस वृक्ष के नीचे पिंडी रूप मे स्तिथ हु . तुम मेरे परम भगत हो अत: यहाँ रहकर मेरी आराधना और सेवा करो.. मै छिन्मस्तिका के नाम से पुकारी जाती हु.. तुम्हारी चिंता दूर करने के कारन अब मै यहाँ चिन्तपुरनी नाम से प्रिसद्ध हो जाउंगी.. माईदास जे ने नतमस्तक होकर निवदन किया - हे जगजननी भगवती! मै अल्प बुद्दी व् अशक्त जीव हु.. इस भयानक जंगल मे अकेला किस प्रकार रहूँगा? ना यहाँ पानी, ना रोटी, ना ही कोई स्थान बना है... यहाँ तो दिन मे ही डर लगता है .. रात्री कैसे कटेगी? माता ने कहा कि मै तुमको निर्भय - दान देती हु.. इस मन्त्र का जप करो जिससे तुम्हारा भय दूर होगा.

इस मन्त्र द्वारा तुम मेरी पूजा करो.. नीचे जाकर तुम किसी बड़े पत्थर को उखाड़ो, वह जल मिलेगा, उसी से तुम मेरी पूजा किया करना.. जिन भगतो कि मै चिंता दूर करूंगी, वह स्वय ही मेरा मंदिर बनवा देंगे .. जो चडावा चडेगा उससे तुम्हारा गुजारा हो जायेगा.. सूतक - पातक का विचार ना करना.. मेरी पूजा का अधिकार तुम्हारे वंश को ही होगा.. ऐसा कहकर माता पिंडी के रूप मे लोप हो गई

भगत माईदास कि चिंता का निवारण हुआ.. वह प्र्फुल्ल्चित पहाड़ी से थोडा नीचे उतरे और एक बड़ा पत्थर हटाया तो काफी मात्र मे जल निकल आया. माईदास कि ख़ुशी कि सीमा ना रही.. उन्होंने वाही अपनी झोंपड़ी बना ली और उसी जल से नित्य नियमपूर्वक पिंडी कि पूजा करनी प्रारम्भ कर दी .. आज भी वह बड़ा पत्थर , जिसे माईदास जी ने उखाड़ा था, चिन्तपुरनी - मंदिर मे रखा हुआ है.. जिस स्थान से जल निकला था.. वह अब सुंदर तालाब बनवा दिया गया है.. इस स्थान से जल लाकर माता जी का अभिषेक किया जाता है


बोलिए माँ चिन्तपुरनी की जय
लिखने मे कोई गलती हो तो अल्प बुद्दी समझ  कर माफ़ करना
माँ का दास संजय मेहता
जय माता दी जी





मैनू चाहिदा सहारा तेरे नाम दा, menu chahida sahara tere naam da.. Sanjay Mehta Ludhiana











मैनू चाहिदा सहारा तेरे नाम दा होर कोई ना सहारा बिन तेरे
जय भवानी जय अम्बे , जय भवानी जय अम्बे

तेरे चोले नु लावा मै टिकिया -२ तेनु पूज्दिया माँ कंजका निकिया
जय भवानी जय अम्बे , जय भवानी जय अम्बे

तेरे चोले नु लावा माँ केसर -२ तेनु पूजदे ने माँ पंज परमेश्वर
जय भवानी जय अम्बे , जय भवानी जय अम्बे

तेरे चोले नु लावा माँ हीरे-२ तेनु पूजे ने माँ छोटे वड्डे वीरे
जय भवानी जय अम्बे , जय भवानी जय अम्बे

तेनु चोले नु लावा माँ किनारी-२ तेनु पूज्दी माँ दुनिया सारी
जय भवानी जय अम्बे , जय भवानी जय अम्बे

जय माता दी जी _/|\_ जय माता दी जी _/|\_




रविवार, 16 अक्टूबर 2011








जय काली कलकते वाली, तेरा वार ना जाए खाली, तुमने सबकी विपता टाली बोलो भगतो जय माँ काली की जय माता दी जी

श्री काली देवी का स्र्वप्रिसिध शक्तिपीठ भारत के परमुख नगर कलकता मे स्थित है.. यहाँ पर भगवती सती के 'केश' (बाल) गिरे थे.. यहाँ श्री काली देवी के तीन मंदिर क्रमश: रक्ताम्बरा मुंडमालिनी तथा नुक्केशिनी नामो से है..


कुछ दैत्यों को मार दिया, कुछ को खाया महाकाली ने
कुछ को पैरो से कुचल दिया, कुछ मसले खप्पर वाली ने
दल पर दल मार दिए, फेंके, महाशक्ति दीन दयाली ने
भेंटे दुर्गा को चंड - मुंड सिर, काटे थे जो महाकाली ने
काली बोली माता अम्बे, इन दुष्टों को स्वीकार करो
तेरी ही शक्ति से मारे , जग भगतो का कल्याण करो
दुर्गा बोली, देवी काली , तुम जाओ अब विश्राम करो
चामुंडा होगा नाम तेरा, निज भगतो के संताप हरो
बोलो माँ के प्यारो जय माता दी जी






शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

सुन भगत सुदामा : Sun Bhagt Sudama: Sanjay Mehta Ludhiana









सुन भगत सुदामा से रो - रो कह रही नारी
तुम जाओ द्वारिका जी दुःख हर ले कृष्ण मुरारी

इसी किस्मत मेरी खोटी
कभी ना खाई सुख की रोटी
मै रो रो मरती जी
पैसे बिन बड़ी लाचारी सुन भगत...

बच्चे फिरते तन से नंगे
जैसे फिरते हो भिखमंगे
मै कुड कुड मरती जी
चुप रहू शर्म की मारी सुन भगत...

होली बीती आई दिवाली
घर मे बज राझी खली थाली
मै सह नहीं सकती जी
बच्चो की हा हाकारी सुन भगत....

कहे सुदामा सुन मेरी प्यारी
बात तो है तेरी सच्ची साड़ी
पर मै नहीं जाऊ री
मेरे मित्र है गिरधारी सुन भगत...

क्या कुछ तोहफा लेकर जाऊ
कैसे उनको मुख दिखलाऊ
वहां पुलिस पकड़ लेगी
कर देगी मेरी ख्वारी सुन भगत...

बहु मांगकर चावल लाई
फटे चिर मे गाँठ लगाई
चल दिए सुदामा जी
जहा बसते है त्रिपुरारी सुन भगत...






गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे : Maiya Ji Kalam Dwat Hath Tere: Sanjay Mehta Ludhiana











मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे

पहला ता लेख मेरे मथे दा लिख दे सीस झुकाना दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे


दूजा ता लेख मेरे कन्ना दा लिख दे मै भेंट सुना दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे

तीजा ता लेख मेरे अंखा दा लिख दे दर्शन करा मै दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे

चौथा ता लेख मेरी जीवा दा लिख दे मै नाम जपा दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे


पंजवा ता लेख मेरे हथा दा लिख दे मै सेवा करा दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे

छेवा ता लेख मेरे पैर दा लिख दे मै दर ते आवा नित तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे



मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे : Maiya Ji Kalam Dwat Hath Tere: Sanjay Mehta Ludhiana










मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे

पहला ता लेख मेरे मथे दा लिख दे सीस झुकाना दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे


दूजा ता लेख मेरे कन्ना दा लिख दे मै भेंट सुना दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे

तीजा ता लेख मेरे अंखा दा लिख दे दर्शन करा मै दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे

चौथा ता लेख मेरी जीवा दा लिख दे मै नाम जपा दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे


पंजवा ता लेख मेरे हथा दा लिख दे मै सेवा करा दर तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे

छेवा ता लेख मेरे पैर दा लिख दे मै दर ते आवा नित तेरे
मैया जी कलम दवात हाथ तेरे, सोणे मेरे लेख लिख दे




शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

Maa Bhadarkaali Mandir Kurukshetr By Sanjay Mehta Ludhiana










Maa bhadrakali devi,online Pooja /Archana,Havan Yagya Anushtaanam Abishekam at various temples of the holy land of Kurukshetra

















कथा अनुसार ५१ विभिन्न स्थानों पर माता सती के अंग-प्रत्यंग गिरे.. इन्ही मे से कुरुक्षेत्र स्थित भद्रकाली मंदिर की गणना है . यहाँ माँ सती का दया टखना गिरा था. चेत्र व् असौज मे माता के मेले भरते है.. यहाँ पर देवीकूप और देवीमाता - तालाब है.. कहते है महाभारत का युद्ध प्रारम्भ होने से पहले भगवन कृष्ण ने इस देवी-कूप पर सोने का घोडा चडाने की मन्नत मानी थी.. इसी कथा के अनुसार आज तक देवीकूप पर लोग मन्नत मानते है तथा पूरी होने पर प्रतीक रूप मे लकड़ी के घोड़े चड़ाए जाते है

जय माता दी जी..





शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

माँ अपने दीवाने पर एक कर्म कमा देना : Maa Apne Diwane Par ek Karm: Sanjay Mehta Ludhiana









माँ अपने दीवाने पर एक कर्म कमा देना
जिस दिन मै तुझे भूलू , दुनिया से उठा देना माँ...
बोलिए जय माता दी जी

हु मगर तेरी चोखट पे पड़ा हु माँ
कभी नजर पड़े तेरी, कदमो मे लगा लेना
बोलिए जय माता दी जी


चाहता हु मगर मेरी चाहत भी तो एसी है
कुछ दिल मे दर्द देना , कुछ दर्द दवा देना
बोलिए जय माता दी जी


सपने मे अगर मुझमे अभिमान कही आये
तुझे कसम फकीरों की , मेरा कंठ दबा देना
बोलिए जय माता दी जी


मैया दास हु मै तेरा , मुझे दास ही रहना है
माँ अपने गुलामो में, मेरा नाम लिखा देना
बोलिए जय माता दी जी


अगर देना मुझे मेरी माँ तो मुझे सब्र - शुक्र देना
सुख देके तू सुखदाती , नजरे ना हटा देना
बोलिए जय माता दी जी