गुरुवार, 26 मई 2011

दरबार तेरे आ गये..










दरबार तेरे आ गये..

मै अति दीन अनाथ हु, तुम हो दीनो के नाथ...
तेरी शरण मे आ गयो, रखियो सिर पर हाथ..

बाला हम दरबार तेरे आ गए..
इस तेरी दुनिया से हम घबरा गए..

कब से बेठे है तेरे दरबार मे.. मर रहे है हम तेरे ही प्यार मे..
देखकर लीला तेरी चकरा गए..
इस तेरी दुनिया...


आंसुओ की है झड़ी अब तो लगी.. प्यास दर्शन की मेरे मन मे लगी..
तर गए जो दर्श तेरा पा गए..
इस तेरी दुनिया...


कष्ट दुखियो के मिटाते आप हो.. हम बुलाये क्यों ना आते आप हो..
कर्म मेरा देखकर ठुकरा गए..
इस तेरी दुनिया...

अंजनी के लाल अब तो आइये.. अपने प्यारे भगत को अपनाइए..
फूल श्रद्धा के सभी मुरझा गए..
इस तेरी दुनिया...



Sanjay Mehta, Ludhiana


लोग इस जहां को भूल जायेंगे..









लोग इस जहां को भूल जायेंगे..
माँ कभी ना हम तुम्हे भुलायेंगे..
जितनी भी जहां मे नेमते
माँ तुम्हारे द्वार की है रहमते..
जो कुछ भी माँ तुमने दे दिया..
क्यों करे ना हम तुम्हारे शुक्रिया..
हम तेरा माँ शुक्र ही मनाएंगे..


हम गिरे तो तुम ही सम्भालती
ममता से दुलार से हो पालती..
हम सभी माँ तेरे कर्जदार है..
हर घडी हर वक्त तलबगार है..
कैसे ये एहसान हम चुकायेंगे..
लोग इस जहान...

कब कहाँ तू कैसे आएगी नजर..
क्या पता तू क्या करेगी कब किधर
जिस जगह माँ जो तेरा आकर है..
उसको माँ प्रणाम बार बार है..
हम सिर को उस जगह झुकायेंगे..
लोग इस जहान..


Sanjay Mehta




बुधवार, 25 मई 2011

आरती क्या है और कैसे करनी चाहिए ...












आरती क्या है और कैसे करनी चाहिए ...

आरती को 'आरित्रिका' अथवा 'आरितिर्क' और 'निराजन' भी कहते है. पूजा के अंत मे आरती की जाती है.. पूजन मे जो त्रुटी रह जाती है .. आरती से उसकी पूर्ति होती है.. सकंद्पुरण मे कहा गया है.. :-

मन्त्रहीन क्रियाहीन यत पूजन हरे:
सर्वे स्म्पुर्न्तामेती क्रते नीराजने शिवे..

पूजन मन्त्रहीन और क्रियाहीन होने पर भी निराजन (आरती) कर लेने से उसमे सारी पूर्णता आ जाती है..

आरती से पहले मूलमंत्र (भगवान् या जिस देवता का जिस मन्त्र से पूजन किया गया है , उस मन्त्र) के द्वारा तीन बार पुष्पांजली देनी चाहिए.. और ढोल , नगारे, शंख, घड़ियाल आदी म्हावाध्यो के तथा जय - जयकार के शब्द के साथ शुभ पात्र के घृत से या कपूर से विषय संख्या के अनेक बत्तिय जलाकर आरती करनी चाहिए..

साधारणत:पांच बत्तियो से आरती की जाती है.. इसे 'पंच्प्र्दीप' भी कहते है.. एक, सात या उससे भी अधिक बत्तियो से आरती की जाती है.. कुमकुम , अगर, कपूर , चंदन, रुई, और घी, धुप की एक, पांच या सात बत्तिय बनाकर शंख, घंटा आदी बाजे बजाते हुए आरती करनी चाहिए...

आरती के पांच अंग होते है.. प्रथम दीपमाला के द्वारा, दुसरे जलयुक्त शंख से.. तीसरे धुले हुए वस्त्र से.. चोथे आम और पीपल आदि के पत्तो से और पांचवे साष्टांग दंडवत से आरती करे.. आरती उतारते समय सर्वप्रथम भगवान् कि प्रितमा के चरणों मे उसे चार घुमाये.. दो आर नाभिदेश मे.. एक बार मुखमंडल पर और सात बार समस्त अंगो पर घुमाये..
यथार्थ मे आरती पूजन के अंत मे इष्टदेव कि प्रसनता के हेतु की जाती है.. इसमें इष्टदेव को दीपक दिखने के सात ही उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है..

जय माता दी जी...

Sanjay Mehta

मंगलवार, 24 मई 2011

भगवान तुम्हारे चरणों मे.









भगवान तुम्हारे चरणों मे..






भगवान तुम्हारे चरणों मे.., मै तुम्हे रिझाने आया हु..
वाणी मे तनिक मिठास नहीं, पर विनय सुनाने आया हु.
.




प्रभु का चरणामृत लेने को, है पास मेरे कोई पात्र नहीं..
आँखों के दोनों प्याले मे.. कुछ भीख मांगने आया हु..
भगवान तुम्हारे चरणों मे..

तुम से लेकर क्या भेंट करू.. भगवान आपके चरणों मे..
मै भिक्षुक हु.. तुम दाता हु... सम्बन्ध बताने आया हु..
भगवान तुम्हारे चरणों मे..

सेवा को कोई वास्तु नहीं.. फिर भी मेरा साहस देखो..
रो रोकर आज आंसुओ का, मै हार चढाने आया हु...
भगवान तुम्हारे चरणों मे..

संजय मेहता
जय माता दी जी


सोमवार, 23 मई 2011

जाहि विधि रखे राम..












जाहि विधि रखे राम..


राम राम रटते रहो, जब तक घट मे प्राण..
कबहूँ तो दीन दयाल के, भनक पड़ेगी कान.

सीताराम - सीताराम - सीताराम कहिये..
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये..

मुख मे हो राम नाम, राम सेवा हाथ मे..
तू अकेला नहीं बन्दे, राम तेरे साथ मे..
विधि का विधान जान, हानि लाभ सहिये..
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये..
सीताराम - सीताराम - सीताराम कहिये..

किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पायेगा..
होगा प्यारे वो ही, जो राम जी को भायेगा..
फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिये..
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये..
सीताराम - सीताराम - सीताराम कहिये..

जिन्दगी की डोर सोंप, हाथ दीनानाथ के..
महलो मे रखे चाहे, झोपडी मे वास दे..
धन्वाद, निर्वाद, राम राम कहिये..
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये..
सीताराम - सीताराम - सीताराम कहिये..

आशा एक रामजी से , दूजी आशा छोड़ दे..
नाता एक रामजी से, दूजा नाता तोड़ दे..
काम-रस छोड़ प्यारे, राम रस पीजिये..
साधू संग अंग-अंग, राम रंग रंगिये..
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये..
सीताराम - सीताराम - सीताराम कहिये..


जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये..
सीताराम - सीताराम - सीताराम कहिये..

बोलो श्री राम जय राम जय जय राम..
राम राम राम राम राम राम राम

Sanjay Mehta



शरण मे बुलाना पड़ेगा...







शरण मे बुलाना पड़ेगा...

मुझे माँ शरण मे बुलाना पड़ेगा...
भला हु बुरा हु.. तेरे दर पे पड़ा हु.. मुझको उठाना पड़ेगा...
तुझे माँ यह रिश्ता निभाना पड़ेगा..
बेटा हु तेरा कोई गैर नहीं.. अपनाना पड़ेगा...

मुझे माँ शरण मे बुलाना पड़ेगा...
ममतामयी माँ, दया की हो सागर,
खाली पड़ी क्यों बता मेरी गागर...
नादाँ हु जानू ना कुछ भी मैया, तुझको बताना पड़ेगा...
मुझे माँ शरण मे बुलाना पड़ेगा..

तमन्ना यही है कि पा लू तुझे माँ..
भजनों से अपने रिझा लू तुझे माँ..
मातेश्वरी... शम्भुप्रिया... .. मेरे गीतों को...
सुनाने आना पड़ेगा,
मुझे माँ शरण मे बुलाना पड़ेगा...

जानू ना पूजा फिर भी , मै हु पुजारी,
तेरी दया का, मै हु.. भिखारी...
विनती यही तुझसे मेरी माँ मुझको...
गले से लगाना पड़ेगा...
मुझे माँ शरण मै बुलाना पड़ेगा..

सारे बोलो जय माता दी...

Sanjay Mehta




शुक्रवार, 20 मई 2011

शाम तेरी बंसी हमे भी सुनादे











शाम तेरी बंसी हमे भी सुनादे

वो बचपन की लीला हमे भी दिखा दे

कई कंस फिर सर उठाये फिर रहे

कोरव भी है हाहाकार मचा रहे

ले अवतार फिर इनको तू मिटा दे

आ देवकी के लल्ला यशुदा के नंदन

फिर से तू सबको प्रेम करना सिखा दे

आ फिर से तू गोपिओ संग रास रचा ले

फोड़ मटकी तू फिर से माखन चुरा ले

आ फिर से तू राधा दीवानी बना दे

आ मीरा के गिरधर आ राधा के शाम

आ फिर से तू द्रोपदी का अस्तित्व बचा ले

लुट रही अबला नारी उसे तो पनाह दे

आ धर्म के रक्षक धर्म को बचाने

आ द्वारिका के राजा अर्जुन के सखा रे

आ गोकुल में फिर से तू गयियन चराने

ग्वालो के संग मिलके धूम मशीन

आ फिर से गो सेवा का ज्ञान सबको बताने

आज कट रही गों माता आ उसको बचाले

आज डूबे है हम सब लालच के भंवर में

कर रही है तबाह सब माया की आंधी

आ सब को इस तेज़ आंधी से बचा ले

आ गोवर्धन धारी फिर से गोवर्धन उठा ले

शाम तेरी बंसी हमे भी सुनादे

वो बचपन की लीला हमे भी दिखा दे

संजय मेहता

मधुर राम का नाम जग मे .. मधुर राम का नाम..









मधुर राम का नाम जग मे .. मधुर राम का नाम..
मधुर राम का नाम जग मे .. मधुर राम का नाम..
बजो राम राम राम... जग मे राम राम राम जग मे
मधुर राम का नाम जग मे .. मधुर राम का नाम..


ज्ञान ना जानू... ध्यान ना जानू..
नाम एक ही मै पहचानू...
ज्ञान ना जानू... ध्यान ना जानू..
नाम एक ही मै पहचानू...
अदम अपार सिन्धु मे नैया..
अदम अपार सिन्धु मे नैया..
राम नाम अभराम
मधुर राम का नाम जग मे .. मधुर राम का नाम..
बजो राम राम राम... जग मे राम राम राम

राम राम कहते रहो...
जब तक तन मे प्राण...
कबहू दीन दयाल के..
भनक पड़ेगी कान


Sanjay Mehta




गुरुवार, 19 मई 2011

|| नाग लीला Naag Leela ||












कालिया नाग ने सारे यमुना जल को विषाक्त कर दिया,
श्रीकृष्ण ने बाल्य काल में उसके फनो पर नृत्य कर उसका मान मर्दन किया,
उसे यमुना से दूर भगाया और समाज को भय मुक्त किया .




|| नाग लीला Naag Leela ||





श्री यमुना धेनु आगे,जल मे बेठे प्रभु जी आन के..
नाग नागिनी दोनों बेठे, श्री कृष्ण जी पौह्चे आन के..
नागनी कहती सुनो रे बालक, जाओ यहाँ से भाग के
तेरी सूरत देख मन मे दया उपजी, नाग मरेगा जाग के..
किसका बालक पुत्र कहिये...कोंन तुम्हारा ग्राम है..
किसके घर तू जनमिया रे.. बालक क्या तेरा नाम है..
वासुदेव जी का पुत्र कहिये, गोकुल हमारा ग्राम है..
श्री माता देवकी जन्मिया मेनू... श्री कृष्ण हमारा नाम है..
लेरे बालक हथा दे कंगन, कन्ना दे कुंडल सवा लाख की बोरिया..
इतना द्रव्य ले जा रे बालक, दिया नागां कोलो चोरिया...
क्या करा तेरे हाथो के कंगन, कन्ना दे कुंडल सवा लाख की बोरिया..
श्री मात यशोदा दही बिलोवे..पावा तेरे नाग काले दिया डोरिया..
क्या रे बालक वेद ब्रह्मण , क्या मरिया तू ता चाहुनाये
नाग दल मे आन पौचिया. अब कैसे घर जावनाये..
ना रे पद्मनी वेद ब्राह्मण...नंदजी का मै बालका...
श्री मात यशोदा दही बिलोवे..नेत्र मांगे काले नाग का
कर चूमे भुजा मरोड़ी..नागिनी नाग जगाया...
उठो रे उठो बलवंत योधा , बालक नथने को आया..
उठियो रे उठियो मंडलीक राजा, इन्दर बांगु गरजाया..
बांके मुकुट पर झपट कीनी, श्री कृष्ण जी मुकुट बचाया..
भुजा का बल स्वामी खेंच लीया.. भुजा का बल प्रभु हरण किया..
हाथ जोड़ नाग्निया कहती, हुन बल पिया जी कहा गया..
बंसरी सेती काली नाग नथिया, फन फन नृत्य कराया..
फूल-फूल मथुरा की नगरी, देवकी मंगल गया..
भगत हेती प्रभु जन्म लेकर , लंका मे रावण मारिया..
काली पर्ह्लाद नाग नाथिया..मथुरा मे कंस पछरिया..
सप्त द्वीप नों खंड चोदाह..सभी तेरा है पसारिय..
सूरदास प्रभु तेरा यश गावे, तेरे चरणा ते बलिहरिया

जय माता दी जी...
जय श्री कृष्णा...
राधे राधे..
बोलो मेरी माँ राज रानी की जय...


Sanjay Mehta








|| बजरंग बली मुझ पर ||





|| बजरंग बली मुझ पर ||




बजरंग बली मुझ पर थोड़ी से दया कर दो..
खाली है मेरी झोली इसको भी जरा भर दो..
तेरे द्वारे, पर आये है, बजरंगी मैहर करो..
दुखो से भरा जीवन सुख के भंडार भरो..

कांटो से भरा पथ है फूलो की डगर कर दो..
माँ अंजनि के जाए शंकर के अवतारी..
तेरी लीला को जाने कोई बिरला संसारी..
मै शरण पड़ा तेरी अब शीश हाथ धर दो..

मेरा तन मन बालाजी तुझ पर बलिहारी है..
मैंने तो अर्ज करी, अब मर्जी तुम्हारी है..
मेरी अर्जी पे अब तो थोड़ी से नजर कर दो..
ये दास संजय मेहता है.. तेरा सेवक मतवाला
मेहन्दीपुर के राजा बन जावो रखवाला..
एक बार दर्श देकर मेरा जन्म सफल कर दो..



Sanjay Mehta


भगवान श्री कृष्ण जी से विनम्र प्राथना...












भगवान श्री कृष्ण जी से विनम्र प्राथना...


जनार्दन ! यह संसार -समुंदर अत्यंत गहरा है... इसका पार पाना कठिन है.. यह
दुःखमयी लहरों और मोहमयी भांति भांति की तरंगो से भरा है.. मै अत्यंत दीन हु..
और अपने हो दोषों तथा गुणों से - पाप -पुण्यो से प्रेरित होकर इसमे फंसा हु..
अंतत: आप मेरा इससे उद्धार कीजिये...


कर्मरूपी बादलो की भारी घटा घिरी हुई है.. जो गरजती और बरसती भी है.. मेरे
पातको की राशि विधुल्ल्लता की भांति उसमे थिरक रही है.. मोहरूपी अन्धकार-समूह
से मेरी दृष्टि विवेकशक्ति नष्ट हो गई है.. मै अत्यंत दीन हो रहा हु..
मधुसुदन, मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिये..

यह संसार एक महान वन है, इसमें बहुत से दुःख ही वृक्ष रूप मे स्थित है..
मोहरूपी सिंह इसमें निर्भय होकर निवास करते है.. इसके भीतर शोकरुपी प्रचण्ड
दावानल प्रज्वलित हो रहे है.. जिसकी आंच से मेरा चित संतप्त हो उठा है.. कृष्ण!
इससे मुझे बचाइए

संसार एक वृक्ष के समान है.. यह अत्यंत पुराना होने के साथ बहुत ऊचा भी है..
माया इसकी जड है... शोक तथा नाना प्रकार के दुःख इसकी शाखाये है.. पत्नी आदी
परिवार के लोग पत्ते है... और इसमें अनेक प्रकार के फल लगे है.. मुरारे.. मै इस
संसार - वृक्ष पर चड़कर गिर रहा हु... भगवान ... इस समय मेरी रक्षा
कीजिये...

कृष्ण! मै दुखरुपी अग्नि, विविध प्रकार के मोह रुपी धुएं तथा वियोग, मृत्यु और
काल के समान शोक से जल रहा हु.. आप सर्वदा ज्ञान रुपी जल से सींचकर मुझे सदा के
लिए संसार बंधन से छुड़ा दीजिये..

कृष्ण! मै मोहरूपी अंधार राशि से भरे हुए संसार नामक महान गड्डे मे सदा से गिरा
हुआ हु... दीन हु.. और बी से अत्यंत व्याकुल हु.. आप मेरे लिए नोक बनाकर मुझे
उस गड्डे से निकालिए.. वहा से खींचकर अपनी शरण मे लीजिये..

जो सयम शील ह्रदय के भाव से युगत होकर अनन्य चित से आपका ध्यान करते है.. वे
आपकी पदवी को प्राप्त हो जाते है.. तथा जो देवता और किन्नर्ग्न आपके दोनों परम
पवित्र चरणों को प्रणाम करके उनका चिन्तन करते है.. वे भी आपकी पदवी को
प्राप्त होते है..

मै ना तो दुसरो का नाम लेता हु.. ना दुसरे को भजता हु.. और ना ही दुसरे का
चिन्तन करता हु... नित्य निरंतर आपके युगल चरणों को प्रणाम करता रहता हु.. इस
प्रकार मै आपकी शरण आया हु.. आप मेरी रक्षा करे.. मेरे पटक समूह शीघ्र दूर हो
जाए.. मै नोकर की भांति जन्म जन्म आपका दास बना रहू.. भवन आपके युगल चरण कमलो
को सदा प्रणाम करता हु...

श्री कृष्ण ... यदि आप मुझपर प्रसन्न है.. तो मुझे यह उतम वरदान दीजिये.. मेरी
माता श्रीमति राज रानी मेहता , पिता श्री सुदर्शन लाल मेहता को मेरी पत्नी
श्री मति सोनू मेहता .. मेरे बच्चे (पल्लवी,विकास,दीक्षा) मेरे परिवार को सभी
को आपकी भगति प्राप्त हो.. आप के लोक मे ले चलिए.. आपका आशीर्वाद सदा हमारे साथ
रहे.. भोले बाबा, गणपति जी महाराज.. माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, माँ दुर्गा सब
का आशीर्वाद और सब के साक्षात दर्शन हो..

संजय मेहता...
जय माता दी जी..


Sanjay Mehta

बुधवार, 18 मई 2011

द्वार घाटे वाले का..














द्वार घाटे वाले का..

द्वार घाटे वाले का, दुखियो का ठिकाना है..
बाला जी के चरणों मे खुशिओ का खजाना है..
जग का सताया हु.. तेरे द्वारे पे आया हु..
क्या है परेशानी बाबा को बताना है...
द्वार घाटे वाले का...

सारी दुनिया  मे ढूँढा तुझे मेहंदीपुर मे पाया है...
तेरा मेरा ये रिश्ता बाबा सदियो पुराना है
द्वार घाटे वाले का...

संकट ने जिसको भी आकर के सताया है..
मेहंदीपुर आ जाओ गर संकट कटाना है..
द्वार घाटे वाले का...

ये रिश्ता ये नाते, सब ढोंग दिखावा है..
मै हूँ तेरा तू है मेरा सारा जग ये बेगाना है..

द्वारे घाटे वाले का , दुखियो का ठिकाना है..
बाला जी के चरणों मै खुशिओ का खजाना है..
द्वार घाटे वाले का...
Sanjay Mehta

मंगलवार, 17 मई 2011

चरण वंदना..








चरण वंदना...

मात-पिता से बढकर जग मे, है कोई भगवान नहीं
मात-पिता की सेवा से बढकर, जग मे कुछ काम नहीं...
मात=पिता को जो दुःख देगा, वो पाता सम्मान नहीं..
मात-पिता का करे अनादर, पापी है इंसान नहीं..

कोन देवता पहले पूजा, जाए सूझी बात नई..
परिक्रमा ब्रह्मांड की जो , कर आये पहले पूजे वही
सभी देवता दोड पड़े पर, गणपति वाहन पर ना चडे ..
मात-पिता की परिक्रमा कर, सब से पहले हुए खड़े

हुए विजेता घोषित सब से, पहले पूजते सदा वही..
मात-पिता है पूजनीय, इससे बढकर कुछ ज्ञान नहीं..
जो छूता है पात पिता के, नित्य चरण सुख पता है
मिलती है आशीषे उसको, भवसागर तर जाता है..

मात-पिता का जो करता, उपहास चैन ना उसे मिले
सुख रुपी गुलाब के पोधे, उसके घर मे नहीं खिले.
मात-पिता सब से महान है, धर्म ग्रन्थ सब कहे यही..
स्वर्ग बसे उनके चरणों मे, और मिलेगा कही नहीं..

खुद गीले मे सोकर माँ ने, तुमको सूखे मे रक्खा
माँ का दूध कर्ज है तुम पर, कभी चूका ना पाओगे..
तुमको नरक भोगना होगा, माँ को अगर सताओगे..
मात-पिता को दुःख देने से, मिलते परमानंद नहीं..
उन्हें सुखी रक्खे बिना "संजय" पाओगे आनंद नहीं..

Sanjay Mehta