गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

मेरी मैया रखी मेनू चरना दे कोल


मेरी मैया रखी मेनू चरना दे कोल मेरी दाती तेरे जया कोई ना होर सब था ठोकर खा मै आया किसे नहीं दाती मेनू अपनाया मिली ना किधरे वी ठोर मेरी मैया रखी मेनू चरना दे कोल... सब दे दिला दी माँ तू जाने आये तेरे दर आशा पुजाने बनी क्यों मात कठोर.. मेरी मैया... जगत दी वाली तू माँ अम्बे सब ते कृपा कर जगदम्बे ओंगन ना सादे टटोल- मेरी मैया... मन मंदिर माँ ज्योत है तेरी स्वास स्वास जपे जगदम्बे मेरी मझदार विच ना छोड़- मेरी मैया.... मोह ममता दल दल विच फासया करम कोई मै कर ना सकय पई माँ अज तेरी लोड... मेरी मैया... चमन नादान मैया दर तेरे आया सब कुछ छड मोह तेरे नाल पाया खाली ना दर तो मोड़.. मेरी मैया ... संजय मेहता

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

जगत जगदीश्वरी माँ जगदम्बे आशा पूर्ण करती रहो


जगत जगदीश्वरी माँ जगदम्बे आशा पूर्ण करती रहो अन्नपूर्ण दाती हो तुम सदा भंडारे भारती रहो द्वारे तेरे आया सवाली कभी निराश जावे ना भगति शक्ति दे माँ अम्बे तेरे ही गुण गावे माँ तू है दाती दिला दी जाने, चिन्तपुरनी कहलाती हो चिंता दूर करो माँ मेरी, सब को सुख पौचाती हो तेरी माया का भरमाया, मै हु दास निम्न माँ शरण तेरी मैया मै आया, आशा पुरनी करना माँ ज्वाला हो तुम माँ जगदम्बे , उज्जवल मेरा भविष्य करो बदल दो दाती किस्मत मेरी, उलटे लेख भी सीधे करो तुम बिन कोई नहीं माँ मेरा, शरण तुम्हारी आया हु काम कोई भी सिद्ध ना होवे, कई यत्न कर हरा हु बरकत भरदो हाथ मै मेरे, किरपा इतनी करना माँ अन्नपूर्ण माँ जगदम्बे , भंडारे सदा ही भरना माँ मेरे परिवार की रक्षा करना, कर्ज ना कोई सर पर रहे एसी किरपा करो तुम दाती, वेय्पार मेरा भी बड़ता रहे.. दया तेरी जिस पर हो मैया कभी निराश जाए ना बिगड़े काम भी बन जाते है, शरण तेरी जो आये माँ रक्षक बन रक्षा करती, दास के संकट दूर करो शरण तेरी 'चमन' माँ आया, अन्नपूर्ण भंडारे भरो Sanjay Mehta

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

जय महागौरी जगत की माया


जय महागौरी जगत की माया जय उमा भवानी जय महामाया हरिद्वार कनखल के पासा महागौरी तेरा वहा निवास चंदेर्काली और ममता अम्बे जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे भीमा देवी विमला माता कोशकी देवी जग विखियाता हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा सती 'सत' हवं कुंड मै था जलाया उसी धुएं ने रूप काली बनाया बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया तभी माँ ने महागौरी नाम पाया शरण आने वाले का संकट मिटाया शनिवार को तेरी पूजा जो करता माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता 'चमन' बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो संजय मेहता Sanjay मेहता

रविवार, 10 अप्रैल 2011

कालरात्रि जय जय महाकाली


कालरात्रि जय जय महाकाली
काल के मुह से बचाने वाली
दुष्ट संगारण नाम तुम्हारा
महा चंडी तेरा अवतारा
पृथ्वी और आकाश पे सारा
महाकाली है तेरा पसारा
खंडा खप्पर रखने वाली
दुष्टों का लहू चखने वाली
कलकता स्थान तुम्हारा
सब जगह देखू तेरा नजारा
सभी देवता सब नर नारी
गावे स्तुति सभी तुम्हारी
रक्तदन्ता और अन्न पूर्णा
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना
ना कोई चिंता रहे ना बिमारी
ना कोई गम ना संकट भारी
उस पर कभी कष्ट ना आवे
महाकाली माँ जिसे बचावे
तू भी 'चमन' प्रेम से कह
कालरात्रि माँ तेरी जय संजय मेहता
Sanjay Mehta

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

जय जय अम्बे जय कात्यानी



जय जय अम्बे जय कात्यानी
जय जगमाता जग की महारानी
बैजनाथ स्थान तुम्हारा
वहा वरदाती नाम पुकारा
कई नाम है कई धाम है
यह स्थान भी तो सुखधाम है
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी
हर जगह उत्सव होते रहते
हर मंदिर में भगत है कहते
कत्यानी रक्षक काया की
ग्रंथि काटे मोह माया की
झूठे मोह से छुडाने वाली
अपना नाम जपाने वाली
ब्रेह्स्पतिवार को पूजा करिए
ध्यान कात्यानी का धरिये
हर संकट को दूर करेगी
भंडारे भरपूर करेगी
जो भी माँ को 'चमन' पुकारे
कात्यानी सब कष्ट निवारे संजय मेहता
Sanjay Mehta

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

जय तेरी हो अस्कंध माता



जय तेरी हो अस्कंध माता
पांचवा नाम तुम्हारा आता
सब के मन की जानन हारी
जग जननी सब की महतारी
तेरी ज्योत जलाता रहू मै
हरदम तुम्हे ध्याता रहू मै
कई नामो से तुझे पुकारा
मुझे एक है तेरा सहारा
कही पहाड़ो पर है डेरा
कई शेहरो मै तेरा बसेरा
हर मंदिर मै तेरे नजारे
गुण गाये तेरे भगत प्यारे
भगति अपनी मुझे दिला दो
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इन्दर आदी देवता मिल सारे
करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये
तुम ही खंडा हाथ उठाये
दासो को सदा बचाने आई
'चमन' की आस पुजाने आई
संजय मेहता Sanjay Mehta

गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

कुष्मांडा जय जग सुखदानी


कुष्मांडा जय जग सुखदानी
मुझ पर दया करो महारानी
पिंगला ज्वालामुखी निराली
शाकम्बरी माँ भोली भाली
लाखो नाम निराले तेरे
भगत कई मतवाले तेरे
भीमा पर्वत पर है डेरा
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा
संब की सुनती हो जगदम्बे
सुख पौचाती हो माँ अम्बे
तेरे दर्शन का मै प्यासा
पूर्ण कर दो मेरी आशा
माँ के मन मै ममता भारी
क्यों ना सुनेगी अर्ज हमारी
तेरे दर पर किया है डेरा
दूर करो माँ संकट मेरा
मेरे कारज पुरे कर दो
मेरे तुम भंडारे भर दो
तेरा दास तुझे ही ध्याये
'चमन' तेरे दर शीश झुकाए
संजय मेहता Sanjay Mehta

बुधवार, 6 अप्रैल 2011

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

जय अम्बे ब्रेह्म्चारनी माता



जय अम्बे ब्रेह्म्चारनी माता
जय चतुर्णन प्रिय सुख दाता
ब्रह्मा जी के मन भाती हो
ज्ञान सभी को सिखलाती हो
ब्रह्म मन्त्र हो जाप तुम्हारा
जिस को जपे सकल संसारा
जय गायत्री वेद की माता
जो जन निस दिन तुम्हे ध्याता
कमी कोई रहने ना पाए
कोई भी दुःख सहने ना पाए
उसकी विरती रहे ठिकाने
जो तेरी महिमा को जाने
रुद्राक्ष की माला लेकर
जपे जो मन्त्र श्रधा देकर
आलस छोड़ करे गुनगाना
माँ तुम उसको सुख पौह्चना
ब्रेह्म्चारिणी तेरो नाम
पूर्ण करो सब मेरे काम
'चमन' तेरे चरणों का पुजारी
रखना लाज मेरी महतारी संजय मेहता Sanjay Mehta

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

( पहली शेल पुत्री कहलावे )

( पहली शेल पुत्री कहलावे )
शेल पुत्री माँ बैल असवार
करे देवता जय जय कार
शिव शंकर की प्रिय भवानी
तेरी महिमा किसी ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे
जो तुझे सुमरे सो सुख पावे
ऋद्धि सिद्धि परवान करे तू
दया करे धनवान करे तू
सोमवार को शिव संग प्यारी
आरती तेरी जिसने उतारी
उसकी सगरी आस पूजा दो
सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो
घी का सुंदर दीप जलाके
गोला गारी का भोग लगा के श्रधा भाव से मन्त्र गाये
प्रेम सहित फिर शीश झुकाए
जय गिरिराज किशोरी अम्बे
शिव मुख चंदर चकोरी अम्बे
मनो कामना पूर्ण कर दो
'चमन' सदा सुख सम्पति भर दो
संजय मेहता Sanjay Mehta

शनिवार, 2 अप्रैल 2011

राधे राधे मेरा हर एक आँसू राधे तुझे ही पुकारे है ~

राधे राधे मेरा हर एक आँसू राधे तुझे ही पुकारे है ~ मेरी पहुँच तुझ तक सिर्फ आँसुओं के सहारे है ~ जब आप की याद राधे सही न जाए ~ आप को सामने न पा कर दिल मेरा घबराए है ~ तब ज़ुबा, हाथ , पांव सब बेबस होते है ~ इन्ही का काम राधे आँसू कर देते है ~ ये आप तक तो नहीं पहुँते पर फिर भी ~ इस तङप को कुछ शांत कर देते है ~ जब तक ये बहते है राधे आँखे बंद रहती है ~ बंद आँखे ही राधे मुझे आप से मिलाती है ~ बह बह कर राधे जब ये थक जाते है ~ कुछ समय सांस लेने खुद ही रूक जाते है , पर आप की याद कभी नहीं थकती है, बिना रूके सदा मेरी सांसों के साथ ही चलती है ~ मुझे मंज़ूर है ये सौदा आप यूँ ही याद आते रहिए ~ आँसूओं के सहारे ही सही मेरे नैनों में समाते रहिए~~ राधे राधे Sanjay Mehta

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

सज रही मेरी अम्बे मैया सुनहरी गोटे मे -२


सज रही मेरी अम्बे मैया सुनहरी गोटे मे -२ सज रही मेरी अम्बे मैया सुनहरी गोटे मे -२ सुनहरी गोटे मे रुपेहरी गोटे मे -२ सज रही मेरी अम्बे मैया सुनहरी गोटे मे -२ मैया तेरी चुनरी की गजब है बात -२ चंदा जैसा मुखड़ा... मेहँदी से रचे हाथ -२ सज रही मेरी अम्बे मैया सुनहरी गोटे मे -२ मैया के प्यारे श्रीधर बेचारे.. करते वो निर्दन नित्य कन्या पूजन माँ पर्सन हो उनपर आई कन्या बनकर उनके घर आई... यह हुकम सुनाई.... कल अपने घर पे रखो... विशाल भंडारा.. कराओ सब को भोजन.. बुलाओ गाव सारा सज रही मेरी अम्बे मैया सुनहरी गोटे मे -२ श्रीधर जी विचारों मे डूब गए .... आखिर यह कन्या कोन थी वो सोचने लगे.. मे निर्धन इतने बड़े भंडारे का आयोजन कैसे कर सकता हु सहसा उन के मन मे विचार आया... की वो कन्या कोई सदारण कन्या नहीं थी... कोई महान शक्ति थी और जब उस ने यह महान कार्य का हुकम दिया है तो उस का पर्बंध ही वो ही करेगी यह सोच कर निमंत्रण देने निकल पड़े... गाव गाव संदेसा दिया .. रस्ते मे गोरखनाथ जी मिल गए.. जब उन्हें निमंत्रण दिया... तो वो मुस्कुरा कर बोले.. ब्राह्मण भैरवनाथ और ३६० चेलो को तो देवराज इन्दर भी भोजन ना खिला सकते.. तो तेरी क्या ओकात है... परन्तु उस कन्या की परीक्षा लेने हम जरुर आयेंगे... माँ का संदेसा घर घर मे पुचा.. करने को भोजन .. आ गए सब ब्रह्मण... भैरव भी आया.. चेलो को बुलाया.. श्रीधर घबराया...कुछ समझ ना पाए.. फिर कन्या आई ... उन्हें धीर भंदाई... वो दिव्या शक्ति श्रीधर से बोली तुम मत घबराओ .. अब बहार आओ .. सब अथिति अपने... कुट्टिया मे लाओ श्रीधर जी बोले फिर बहार आकर ... सब भोजन कर ले कुट्टिया मे चल कर फिर भैरव भोले.. मै और मेरे चेले... कुट्टिया मे तेरी... बैठेंगे कैसे.. बोले फिर श्रीधर ... तुम चलो तो अंदर... स्थान की चिंता... तुम छोड़ दो मुझपर तब लगा के आसन .. बेठे सब ब्रह्मण ... कुट्टिया के अंदर... करने को भोजन.. भंडारे का आयोजन श्रीधर जी से करवाया... फिर सब को पेट भर के भोजन तुमने कराया . मैया तुम्हारी माया क्या समझे कोई... जो भी तुझे पूजे.. नसीबो वाला होई सज रही मेरी अम्बे मैया सुनहरी गोटे मे -२ कन्या ने जब अपने विचित्र पात्र से सब को भोजन देना अरम्ब किया तो श्रीधर जी पर्सन हो उठे सब हैरान रह गए.. भैरव ने सोचा के यह कन्या जरुर कोई शक्ति है कन्या भोजन परोसती हुई.. जब भैरव के पास पहुची तो भैरव भोला.. कन्या... तुम ने सब को उन की इच्छा का भोजन दिया है परन्तु मै कुछ और चाहता हु... तो माँ बोली... बोलो योगिराज... आप को क्या चाहिए तो भैरव ने कन्या से मॉस और मदिरा मांगी कन्या ने भैरव से आदेश के स्वर मै कहा. सुन ले हे ब्रह्मण .. यह वैष्णव भोजन .. ब्रह्मण जो खाते... वो ही तुम्हे खिलते... हठ की जो तुमने.. बड़ा पाप लगेगा... यहाँ मॉस और मदिरा .. तुझे नहीं मिलेगा... यह है वैष्णो भंडारा... तू मान ले मेरा कहना... ब्रह्मण को मॉस मदिरा से क्या है लेना देना सज रही मेरी वैष्णो मैया सुनहरी गोटे मे -२ कन्या ने भैरव से कहा ... जो कुछ वैष्णव भंडारे मै होता है वो ही मिलेगा... भैरव हठ करने लगा.. क्यों की उस को तो कन्या की परीक्षा लेनी थी... उस के मन की बात माता रानी पहले ही समझ चुकी थी.. ज्यो ही भैरव ने मात रानी को पकड़ना चाह... वो महामाया अन्तेर्ध्यान हो गई... भैरव ने योगविद्या से देखा... वो दिव्या कन्या पवन रूप हो कर त्रिकुट पर्वत की और बढ रही है .. दर्शनी दरवाजा.. बाण गंगा... चरण पादुका आदी सथानो से होकर.. आदी कुमारी वाले स्थान पर पहच कर गर्भ जून गुफा मै ९ महीनो तक विश्राम किया... भैरव ना छोड़ा... मैया का पीछा.. माँ गुफा मै जब छुप गई जा कर ... जब गर्भ गुफा मै भैरव जाता था.. पहरे पर बेठे... लंगूर ने रोका... अड़ गया था भैरव अपनी जिद पर लंगूर भैरव मै हुआ युद्ध भैय्नकर फिर आदी शक्ति ... जब गरब गुफा से ..थी बहार निकली... तो रूप बनाया... भैरव गबराया .. तलवार एक मारी... भैरव संहारी... भैरव के तन से आवाज़ एक आई.. हे आदी शक्ति.. हे चंडी माई...मुझ पर किरपा कर... मेरा दोष भुला कर... मुझे कोई वर दे... यह करुना कर दे मै हु अपराधी.. तेरी भगति साधी.. मेरा दोष मिटादे... निर्दोष बनादे ... भैरव शरणागत आया... तो बोली वैष्णो माता.. मेरी पूजा के बाद में होगी तेरी भी पूजा.. मैया जी के दर्शन जो भैरव मंदिर मे जाए.. मैया की किरपा से वो मनचाहा वर पाए.. सज रही मेरी अम्बे मैया सुनहरी गोटे मे -२ Sanjay Mehta

गुरुवार, 31 मार्च 2011

शिर्डी की पावन भूमि पर पाँव रखेगा जो भी कोई




शिर्डी की पावन भूमि पर पाँव रखेगा जो भी कोई । तत्क्षण मिट जाएंगे कष्ट उसके, हो जो भी कोई || १ || चढे़गा जो मेरी समाधी की सीढी । मिटेगा उसका दुःख और चिंताएँ सारी || २ || गया छोड़ इस देह को फिर भी । दौड़ा आऊंगा निजभक्त हेतु || ३ || मनोकामना पूर्ण करे यह मेरी समाधि । रखो इस पर विश्वास और द्रढ़ बुद्धि || ४ || नित्य हूँ जीवित मैं, जानो यहाँ सत्य । कर लो प्रचीति, स्वंय के अनुभव से || ५ || मेरी शरण मैं आके कोई गया हो खाली । ऐसा मुझे बता दे, कोई भी एक सवाली || ६ || भजेगा मुझको जो भी जिस भावः से । पायेगा मुजको वह उसी भाव से || ७ || तुम्हारा सब भार उठाँऊंगा मैं सर्वथा । नहीं इसमें संशय, यह वचन है मेरा || ८ || मिलेगी सहाय यहाँ सबको ही जानो । मिलेगा उसको वही, जो भी मांगो || ९ || हो गया जो तन मन वचन से मेरा । ऋणी हूँ में उसका सदा-सर्वथा ही || १० || कहे साई वही हुआ धन्य-धन्य । हुआ जो मेरे चरणों से अनन्य ||

बुधवार, 30 मार्च 2011

शिव स्तुति


शिव स्तुति

भगतो को अभेय करने वाले देवदेवेश्वर! आपको नमस्कार है... दक्ष यग विध्वंस करने वाले गोरिपते.... आपको नमस्कार है... आप ही शर्व, रुदर, भव और वर्द आदी नामो से प्रिसद्ध है.. आपको नमस्कार है... आप पशुओ (जीवो) के स्वामी, नित्य उग्र स्वरूप तथा जटाजूट धारण करनेवाले हो.. आपको नमस्कार है... आप ही महादेव, भीम और त्रियम्बकम (त्रिनेतार्धारी) कहलाते है... आपको नमस्कार हो... प्रजापालक , सबके इश्वर, अंधकासुर का वध करनेवाले भी आप ही है.. आपको नमस्कार है.. आप नीलकंठ, भीम, वेधा, ब्रह्माजी के द्वारा स्तुत, कुमार को जनाम्देनेवाले विलोहित, धूम्र, शिव, करथन, नीलशिखंड शूली, दिव्यशाई ,उग्र और त्रिनेत्र आदी नामो से प्रिसद्ध है.. आपका स्वरूप किसी के चिंतन मै नहीं आ सकता.. आप देवी पार्वती के स्वामी है... सम्पुरण देवता आपकी स्तुति करते है.. आप शरण लेने योग्य, कामना करने योग्य और स्धोजात नाम से प्रिसद्ध है.. आपको मेरा नमस्कार है.. आपकी ध्वजा वृषभ चिन्ह है.. आप मुंडित भी है और जटाधारी भी.. आप ब्रेह्म्चारिया वर्त का पालन करने वाले , तपस्वी, शांत, ब्रह्मण भगत , जयस्वरूप , विश्व के आत्मा, संसार की सृष्टि करने वाले तथा सम्पुरण विश्व को व्यापत करके स्थित है.. आपको नमस्कार है.. आप दिव्यस्वरूप, शरणागत का कष्ट दूर करनेवाले, भगतो पर सदा ही दया रखनेवाले तथा विश्व तेज़ और मन मै व्याप्त रहनेवाले है.. आप को मेरा बारम्बार नमस्कार है.. Sanjay Mehta

शनिवार, 26 मार्च 2011

अंबे तू हे जगद अंबे काली


अंबे तू हे जगद अंबे काली जय दुर्गे गब्बर वाली तेरे ही गुन गाये भारती ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती उतारे तेरी आरती महाकाली तेरी आरती तेरे भक्तजनों पर माता घिर पड़ी है भारी दानव दल पर टूट पडो माँ कर के सिंह सवारी सो सो सिंहो से है बलसाली है दस भुजा वाली दुखियों के दुःख निवारती ओ मैया ... माँ तेरा है इस जग मैं बड़ा ही निर्मल नाता ऊंट कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता सब पे करुना बरसाने वाली अमृत बरसाने वाली दुखियों के दुःख निवारती ओ मैया ... ना मांगे हम धन और दौलत ना चांदी ना सोना हम तो मांगे माँ तेरे मन मैं एक छोटा सा कौना सबकी बिगड़ी बनाने वाली लाज बचाने वाली सदिओं के सत् को संवारती ओ मैया ... जय माँ काली -- Sanjay Mehta

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

Mahalaxmi Aarti

Mahalaxmi Aarti Om Jai Laxmi Mata, Maiya JaiLaxmi Mata, Tumko nis din sevat, Hari, Vishnu Data Om Jai Laxmi Mata Uma Rama Brahmaani, Tum ho Jag Mata, Maiya, Tum ho Jag Mata, Surya ChanraMa dhyaavat, Naarad Rishi gaata. Om Jai Laxmi Mata. Durga Roop Niranjani, Sukh Sampati Data, Maiya Sukh Sampati Data Jo koyee tumko dhyaataa, Ridhee Sidhee dhan paataa Om Jai Laxmi Mata. Jis ghar mein tu rehtee, sab sukh guna aataa, Maiya sab sukh guna aataa, Taap paap mit jaataa, Man naheen ghabraataa. Om Jai Laxmi Mata Dhoop Deep phal meva, Ma sweekaar karo, Maiya Ma sweekaar karo, Gyaan prakaash karo Ma, Moha agyaan haro. Om Jai Laxmi Mata. Maha Laxmiji ki Aarti, nis din jo gaavey Maiya nis din jo gaavey, Dukh jaavey, sukh aavey, Ati aananda paavey. Om Jai Laxmi Mata.

रविवार, 20 मार्च 2011